कल रात सुर संग्राम देखने गया था २०० रूपये का ब्लैक में पास का जुगाड़ किया पर लेट होने के कारन पीछे ही खड़ा होना पड़ा .छात्र जो अन्दर नहीं घुश पाए थे वे धीरे धीरे अपना उत्तेजित रूप दिखाने लगे .पहले पीछे के गड़े गए बांस टूटे फिर कांटेदार तर वाली फेंसिंग भी उखड दी गयी ये सब प्रशाशन देखती रही क्योंकि इससे प्रोग्राम ख़राब हो जाता .पर जैसे ही मुन्नी बदनाम हुई वैसे ही गाँधी मैदान भी बदनाम हो गया पुलिस को दोड़ाया गया और पुलिस डोडती रही .आगजनी हुई और सुर संग्राम सिर्फ एक संग्राम बन के रह गया .प्रोग्राम को बंद को दिया गया .जब सब कुच्छ सांत हो गया तो पुलिस अपना काम करने आई और कई राहगीरों को दौड़ा दौड़ा के मारा .और रात भर बेगुनाहों पर पुलिस ने अपना गुस्सा उतरा .क्या किसी ने ये जानना चाहा की ये क्यों और कैसे हुआ ...........ये सोचने की जरूरत है...!!!!!!
सोमवार, 20 दिसंबर 2010
शुक्रवार, 20 अगस्त 2010
dhanwan delhi...
delhi hi bhagwan hai..
delhi me khela khel ka khel,
kyoki delhi aaj dhanwan hai.
hame kya matlab un garibo se,jo delhi me virajman hain..
desh ki ijjat kya hoti hai,
hum kya jaane ,humne to bas yehi sikha hai ki,mera desh mahan hai!!!!!!!
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